
झरिया। झरिया जलागार से महज करीब 100 मीटर की दूरी पर दर्जनों मकानों में दरार पड़ने की घटना से स्थानीय नागरिकों और व्यवसायियों में भारी आक्रोश है। इसी को लेकर सोमवार को झरिया बाटा मोड़ स्थित गणेश चौक के समीप क्षेत्र संख्या-9 के महाप्रबंधक एसके गायकवाड़ का पुतला दहन कर लोगों ने विरोध जताया।
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने जमकर नारेबाजी की। इस दौरान “राजापुर परियोजना बंद करो”, “झरिया जलागार सुरक्षित करो”, “बीसीसीएल प्रबंधन मुर्दाबाद” और “आउटसोर्सिंग कंपनी के संचालक मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाए गए।
विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों का आरोप है कि राजापुर परियोजना में अनियमित उत्खनन कार्य के कारण झरिया जलागार पर खतरा मंडरा रहा है। लोगों ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि मकानों में आई दरार जलागार तक पहुंच जाती, तो झरिया की हजारों आबादी को होने वाली जलापूर्ति पर इसका क्या असर पड़ता? इस आशंका ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि झरिया जलागार क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसकी सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। लोगों ने राजापुर परियोजना को बंद करने की मांग करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में परियोजना का संचालन झरिया के लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
वहीं, प्रदर्शनकारियों ने राजापुर परियोजना में कथित भ्रष्टाचार और गबन के आरोप भी लगाए। उनका आरोप है कि आरओसीपी आउटसोर्सिंग कंपनी के एजेंट और महाप्रबंधक की कथित मिलीभगत से ओवरबर्डन हटाने के नाम पर फर्जी बिल तैयार कर करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार एवं गबन को अंजाम दिया गया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
लोगों ने कहा कि वर्तमान में धनबाद सांसद ढुल्लू महतो केंद्रीय ऊर्जा समिति की बैठक के सिलसिले में तमिलनाडु के मदुरै में हैं। उनके लौटने के बाद झरिया की पूरी स्थिति से उन्हें अवगत कराया जाएगा और कोल इंडिया स्तर पर पूरे मामले की जांच की मांग की जाएगी।
स्थानीय लोगों ने स्पष्ट कहा कि झरिया जलागार की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और किसी भी परियोजना की वजह से हजारों लोगों की जलापूर्ति एवं सुरक्षा खतरे में नहीं पड़नी चाहिए।
जितेश कुमार की रिपोर्ट
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